माखनलाल चतुर्वेदी विनम्म्र पूर्ण श्रद्धांजलि/ पुण्य तिथि
जीवन परिचय=माखनलाल चतुर्वेदी जी का जन्म 4 अप्रैल 1889 इश्वी में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिला का बाबा नानक गांव में हुआ था इनके पिता का नाम नंदलाल चतुर्वेदी था जो की एक शिक्षक थे चतुर्वेदी जीजी ने केवल प्राथमिक शिक्षा किसी संस्था में रह कर प्रप्त की बाकी की शिक्षा घर पर ही रह कर प्रप्त की
चतुर्वेदी जी अपनी लगन से ही घर पर ही रह कर अंग्रेजी, गुजराती, बंगाली, और संस्कृत की शिक्षा खुद से पूरी की ,
कर्म क्षेत्र =प्रसिद्ध पत्रिका प्रभा का सम्पादन किया,चतुर्वेदी जी ने खंडवा से कर्म वीर प्रकाशित होने वाले पत्रिका का लगभाग 30 साल तक सम्पादन या प्रकाशन कार्य किया,कालांतर मे चतुर्वेदी जी गणेश शंकर विद्यार्थी के संपर्क में आए और 1913 में शिक्षक की नोकरी से त्यागपत्र दे दिया और पुरीतरह काव्य साधना पत्रकारिता और राष्ट्रीय आंदोलन में सामिल हो गए!
कविता = देशप्रेम के साथ साथ आपकी कविताओ में प्रकृति और प्रेम का बी चित्रन हुआ!
कैशी है पहचान तुम्हारी
राह भुलने पर मिलते हो,
भिसन वाद विवाद क्या तुमको है
कुरुक्षेत्र हल्दी घाटी का याद,
शिर पर है प्रलय आंखो में मस्ती
मुठ्ठी में मंचाही,
लक्ष्य मातृ मेरा प्रियतम है
मैं हूं एक सिपाही,
प्रकाशित पत्रकारिता =हिन्दी जगत के इतिहास में माखनलाल चतुर्वेदी जी की रचनाये एक अमूल्य धरोहर है ,वेदु लो गुंजे धर,हिमकिरिटिन,
अपनी कविता साधना में भावत्मक सैली का प्रयोग किया आपने प्रेरणा का भाओ बी अपने कविता में भरा!
युग चरण, समर्पण,मरन ज्वार, माता बिजुरि काजल आंज
दक्षिण अफ्रीका में शस्त्र का सफल परीक्षण किया तभी भारतीय राष्ट्रीय केंद्र में मोहनदास करम चंद्र गांधी का आगमन हो चुका था चतुर्वेदी जी आंदोलनो में भाग लेना सुरु कर दीये थे, आंदोलनो के बिच काई बार करावाश भी जाना पड़ा करावाश मुझे, भी उनकी कलम नहीं रुकी काव्या साधना, कलाम का परिचय,हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सभापति निर्वाचित हुए! आपकी कविता सेवा के लिए सागर विश्वविद्यालय ने डी ली टी की उपाधी दी!
चाह नहीं मैं सुरबाला के
गहनो में गुथ जाऊ,
1963 में भारत ने चतुर्वेदी जी को पद्मभूषण की उपाधि से अलंकृत किया
अपनी कविताओं से नवजागरण व क्रांति बिगुल बजाने वाला कलम का यह सिपाही जनवरी सन 1968 इस्वी को दिवांगत हो गया!
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